छतरपुर। जिला जेल से सामने आए एक वायरल वीडियो के बाद जेल प्रशासन पर लगे आरोप और गंभीर हो गए हैं। वीडियो में जेल परिसर के भीतर कैंटीन में पैसों का लेन-देन और सौदेबाज़ी साफ दिखाई दे रही है। आरोप है कि जेल में बंद कैदियों के परिजनों से सामान पहुंचाने के एवज में मनमाफिक रकम वसूली जा रही है, जिसके लिए कथित तौर पर निर्देशात्मक रेट लिस्ट तक तय की गई है।
वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला जेल प्रहरी पर लेन-देन संभालने का आरोप
आरोप है, कि जिला जेल की कैंटीन में बैठी महिला जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार, जेलर दिलीप सिंह जाटव की एजेंट के रूप में काम कर रही थी और पूरे लेन-देन की जिम्मेदारी उसी के पास थी। परिजनों और सूत्रों का दावा है कि यह सब जेल प्रशासन की जानकारी और मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
सामान से लेकर ‘सुविधाओं’ तक तय रेट!
सूत्रों और कैदियों के परिजनों के अनुसार, जेल के भीतर—
कैदियों तक सामान भिजवाने के लिए अलग-अलग दरें तय हैं
जेल में काम न कराने
शौचालयों की सफाई न करवाने
अन्य कैदियों से मारपीट न कराने
और सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तक के लिए भी रेट निर्धारित बताए जा रहे हैं
दावा है कि तय रकम नहीं देने पर कैदियों के साथ मारपीट कराई जाती है।
पैसे नहीं देने पर प्रताड़ना का आरोप
परिजनों का कहना है कि—
जो कैदी या उनके परिजन पैसे देने में असमर्थ होते हैं
उन्हें जेल के भीतर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है
अन्य कैदियों के माध्यम से मारपीट कराई जाती है
इन आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बिना जेल प्रशासन की सहमति के इतना संगठित तंत्र कैसे चल सकता है।
जेलर की भूमिका पर भी सवाल
पूरे प्रकरण में जेलर दिलीप सिंह जाटव की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि—
महिला जेल प्रहरी जेलर की एजेंट बनकर काम कर रही थी
वसूली की रकम तय निर्देशों के तहत ली जा रही थी
सूत्रों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत सामने आ सकती है।
जेलर का पक्ष: ‘झूठे आरोप, दबाव बनाया जा रहा’
मामले को लेकर जेलर दिलीप सिंह जाटव ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा—
“महिला जेल प्रहरी पर कैदियों के परिजनों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की सच्चाई कुछ और है।”
हालांकि, जेलर के इस बयान के विपरीत वायरल वीडियो को ही आरोपों की सच्चाई उजागर करने वाला बताया जा रहा है।
वायरल वीडियो बना सबसे बड़ा आधार
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में—
जेल कैंटीन में पैसों का लेन-देन
सुविधाओं को लेकर बातचीत
कैदियों और जेलकर्मियों के बीच सौदेबाज़ी
स्पष्ट रूप से देखी और सुनी जा सकती है। यही वजह है कि जेल प्रशासन के इनकार के बावजूद मामला और गहराता जा रहा है।
उच्च स्तर तक पहुंचा मामला
सूत्रों के मुताबिक—
वायरल वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है
पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच की तैयारी है
महिला जेल प्रहरी पर निलंबन की कार्रवाई हो सकती है
जेलर की भूमिका की भी जांच तय मानी जा रही है।
छतरपुर जिला जेल में सामने आया यह मामला केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कैदियों के अधिकारों और जेल व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के बाद जेल प्रशासन ठोस कार्रवाई करता है या फिर जेल के भीतर चल रहे लेन-देन का खेल जारी रहेगा।









