पथरिया। सरकार द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने और नौनिहालों का भविष्य संवारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। पथरिया ब्लॉक के ग्राम बासाकला में संचालित निजी स्कूल सन साइन कॉन्वेंट स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र में पाई गई अव्यवस्थाओं ने शिक्षा विभाग और महिला-बाल विकास विभाग की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनपद पंचायत अध्यक्ष खिलान अहिरवार, उपाध्यक्ष उदयभान पटेल, बीडीसी नीलेश सिंह ठाकुर ने सीईओ केके पांडे और बीआरसी जिनेंद्र जैन के साथ स्कूल का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण में सामने आया कि स्कूल आठवीं कक्षा तक संचालित है, लेकिन महज तीन कमरों में ही पूरा स्कूल चल रहा है। बच्चों के बैठने के लिए चटाई तक उपलब्ध नहीं है, जबकि प्रत्येक बच्चे से करीब 4 हजार रुपए फीस वसूली जा रही है। स्कूल की दीवारों पर न तो रंग-रोगन है और न ही बुनियादी शैक्षणिक वातावरण। हैरानी की बात यह है कि इन्हीं हालातों में स्कूल की मान्यता इसी वर्ष नवीनीकृत की गई।
शौचालयों की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। स्कूल में केवल एक शौचालय और एक बाथरूम है, जिनमें दरवाजे तक नहीं लगे हैं। शौचालय का गड्ढा पानी से भरा हुआ और खुला छोड़ा गया है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
आठवीं तक की कक्षाओं का संचालन केवल तीन शिक्षकों के भरोसे है, जिनमें से एक शिक्षिका स्वयं बीए की पढ़ाई कर रही है। निरीक्षण के दौरान जनपद अध्यक्ष खिलान अहिरवार ने बीआरसी जिनेंद्र जैन पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि वे कितनी बार स्कूलों का निरीक्षण करते हैं और क्या वास्तव में व्यवस्थाएं देखते हैं।
इस पर बीआरसी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसी दौरान आंगनवाड़ी केंद्र की स्थिति भी उजागर हुई। वहां बच्चों के खिलौने, टीबी और पीने के पानी के लिए दिया गया आरओ सिस्टम केंद्र में नहीं मिला। जांच में सामने आया कि यह सामग्री आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के घर रखी हुई है। मौके पर पंचनामा बनाकर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
सीईओ केके पांडे ने बताया कि जनपद पंचायत की बैठक में निजी स्कूलों की मान्यता से जुड़ी शर्तों के पालन को लेकर निर्णय लिया गया था। उसी के तहत सन साइन कॉन्वेंट स्कूल का निरीक्षण किया गया, जिसमें मान्यता की शर्तों का उल्लंघन पाया गया है। इस पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। वहीं आंगनवाड़ी केंद्र में मिली अनियमितताओं पर भी कार्रवाई की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो बच्चों का भविष्य इसी तरह अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ता रहेगा।









