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दमोह के श्रीराम जानकी मंदिर शाला के कायाकल्प का रास्ता साफ, सालों पुराने विवाद समाप्त, अजबधाम के महंत राम अनुग्रह दास छोटे महाराज संभालेंगे जिम्मेदारी

On: जनवरी 10, 2026 7:10 अपराह्न
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दमोह शहर के फुटेरा वार्ड क्रमांक 2 में स्थित प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर शाला के कायाकल्प का मार्ग आखिरकार प्रशस्त हो गया है। बीते करीब दस वर्षों से विवादों में उलझे इस मंदिर की स्थिति समय के साथ बेहद जर्जर हो चुकी थी। हालात यह थे कि मंदिर में विराजमान भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण के गर्भगृह की छत गिरने की कगार पर पहुंच गई थी, वहीं परिसर की अन्य इमारतें भी कभी भी ढह जाने की स्थिति में थीं।
जानकारी के अनुसार दिगंबर परंपरा के अंतर्गत संचालित इस मंदिर शाला के अंतिम महंत मनोहरदास के दिवंगत होने के बाद मंदिर का संचालन निजी हाथों में चला गया था। किन्हीं कारणों से विकास कार्य नहीं हो सके और समय बीतने के साथ मंदिर पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच गया।

अजबधाम के महंत को सौंपी गई मंदिर की बागडोर

इसी बीच जिले के प्रसिद्ध अजबधाम शाला के महंत श्री राम अनुग्रह दास छोटे महाराज को यह मंदिर शाला हस्तांतरित की गई है। जिन निजी हाथों में मंदिर का संचालन था, उनके परिजनों ने मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा के दौरान संकल्प लेते हुए मंदिर की संपूर्ण जिम्मेदारी छोटे सरकार को सौंप दी।


हालांकि प्रारंभ में छोटे महाराज यह जिम्मेदारी लेने से संकोच कर रहे थे, लेकिन जनआग्रह और भक्तों के अनुरोध पर उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया.


शनिवार को मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में छोटे सरकार ने बताया कि अब शीघ्र ही मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिले का पहला, 700 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मंदिर

मंदिर के इतिहास पर नजर डालें तो नागा संप्रदाय से जुड़े इस मंदिर की स्थापना को लगभग 700 वर्ष हो चुके हैं। पिछली चार पीढ़ियों में महंत भगवानदास, लक्ष्मणदास, ठाकुरदास और अंत में मनोहरदास ने इसकी बागडोर संभाली। मनोहरदास के बाद नागा परंपरा का संचालन बंद हो गया था।

लाल पत्थर से बनेगा भव्य राम जानकी मंदिर

अजबधाम के महंत राम अनुग्रह दास छोटे महाराज ने बताया कि अब जो मंदिर बनेगा, वह जिले का पहला ऐसा भगवान श्रीराम–जानकी मंदिर होगा, जो अपनी अलौकिक और भव्य संरचना के लिए पहचाना जाएगा। मंदिर का निर्माण लाल पत्थर से किया जाएगा। निर्माण से पहले वर्तमान ढांचे को पूरी तरह डिस्मेंटल किया जाएगा। गर्भगृह के तैयार होने तक भगवान की प्रतिमाओं को वैकल्पिक स्थल पर स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी।

चल-अचल संपत्तियां, लेकिन धन का अभाव

मंदिर की अपनी चल और अचल संपत्तियां भी हैं। जानकारी के अनुसार हटा–दमोह मार्ग पर शहर के मध्य स्थित कृषि भूमि मंदिर की है। इसके अलावा मंदिर के आसपास भी भूखंड हैं। परिसर में एक बड़ी इमारत मौजूद है, जिसमें वर्तमान में एक निजी स्कूल संचालित हो रहा है। हालांकि, फिलहाल मंदिर के पास नकद धनराशि के रूप में कोई चल संपत्ति नहीं है।

छोटे महाराज ने स्पष्ट किया कि मंदिर के कायाकल्प और निर्माण कार्य भक्तों से प्राप्त दान के माध्यम से ही किया जाएगा। बहरहाल, अब राम जानकी मंदिर शाला अजबधाम शाला का हिस्सा बन गई है। मंदिर के विकास और भव्य निर्माण की खबर से शहरवासियों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही यह प्राचीन मंदिर अपने नए, भव्य स्वरूप में धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।

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