सीतानगर में मंदिर शाला की करोड़ों रुपए की कीमती संपत्ति को खुर्दबुर्द किए जाने संबंधी गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस संबंध में शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर को एक शिकायती आवेदन दिया। जिसने कुछ लोगों की कारगुजारियों का भांडाफोड़ हुआ है। शिकायतकर्ता के अनुसार मंदिर शाला की भूमि और अन्य संपत्तियों का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। जबकि संपत्ति का उद्देश्य धार्मिक और लोकहित के लिए है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियमों को ताक पर रखकर संपत्ति का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। न तो आय-व्यय का सही हिसाब रखा जा रहा है और न ही संबंधित दस्तावेजों का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध है। इससे मंदिर शाला की मूल भावना और आस्था दोनों को ठेस पहुंच रही है। मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सौंपे गए आवेदन में गंभीर आरोप
आवेदन के अनुसार श्री देव रामकुमार जानकी रमण मंदिर लोक न्यास सीतानगर बड़ी शाला पंजीकृत सार्वजनिक ट्रस्ट है। जिसके पास सीतानगर, रानगिर सहित अन्य गांवों में करीब 600 एकड़ कृषि भूमि, भारी मशीनरी, वाहन और करोड़ों रुपए की वार्षिक आय है। आरोप है कि नियमों के विरुद्ध समिति गठित कर संतोषदास को अवैध रूप से महंत बनाया गया। ट्रस्ट की चल-अचल संपत्ति, कृषि संसाधनों और मंदिर की आय का निजी दुरुपयोग हुआ। तेरहवीं, पुण्यतिथि व अन्य धार्मिक आयोजनों में फर्जी खर्च व भ्रष्टाचार किया गया तथा बहुमूल्य मूर्तियों व संपत्ति की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
चोरी हुई प्रतिमा का आज तक सुराग नहीं लगा
इधर, इसी मंदिर से कुछ वर्ष पूर्व भगवान राम की बेशकीमती नीलम पत्थर की प्रतिमा चोरी हो गई थी। गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस आज तक इस चोरी का कोई ठोस सुराग नहीं लगा सकी। प्रतिमा चोरी को लेकर मंदिर से जुड़े लोगों पर भी शक की सुई घूमी, लेकिन ठोस सबूत न होने से खुलासा नहीं हो सका।
प्रमुख मांगें…
- ट्रस्ट के संपूर्ण आय-व्यय, संपत्ति प्रबंधन आदि की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
- संतोषदास को तत्काल ट्रस्ट के महंत/प्रबंधक पद से हटाकर पृथक किया जाए।
- अनजु टंडन एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमविरुद्ध कार्यों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- ट्रस्ट की चल-अचल संपत्तियों का ऑडिट कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- मंदिर की मूर्तियों, आभूषणों एवं संपत्तियों की सुरक्षा हेतु प्रशासनिक नियंत्रण हो।
- ट्रस्ट के संचालन हेतु विधि अनुसार नई, पारदर्शी व वैधानिक न्यास समिति का गठन हो।









