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रामराज यादव ने मुस्लिम बेटी को पाल-पोसकर किया विवाह, सामाजिक सौहार्द की पेश की अनूठी मिसाल

On: जनवरी 22, 2026 7:37 पूर्वाह्न
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दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में इंसानियत,सामाजिक भाईचारे और आपसी विश्वास की एक सराहनीय मिसाल सामने आई है। जहां गांव निबौरा तेंदूखेड़ा निवासी हिंदू समाज के व्यक्ति रामराज यादव ने एक मुस्लिम बेटी नजमा को न सिर्फ वर्षों तक पाल-पोसकर बड़ा किया, बल्कि अपने स्वयं के खर्च से उसका विवाह भी संपन्न कराया। इस मानवीय कार्य की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। रामराज यादव ने बताया कि उक्त बेटी के माता-पिता रोज़गार की तलाश में अक्सर दिल्ली जाया करते थे। ऐसे में वे बच्ची को उनके पास छोड़ जाते थे,

रामराज यादव ने मुस्लिम बेटी को पाल-पोसकर किया विवाह, सामाजिक सौहार्द की पेश की अनूठी मिसाल #damoh

समय के साथ रामराज यादव ने उसे अपनी सगी बेटी की तरह स्नेह, सुरक्षा और संस्कार दिए। उसकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर हर ज़रूरत का ध्यान रखा। जब उसके विवाह का समय आया, तो रामराज यादव ने बिना किसी भेदभाव के पूरी जिम्मेदारी स्वयं उठाई और परंपराओं के अनुसार कन्यादान किया। रामराज यादव ने भावुक होते हुए कहा – “मैंने कभी धर्म नहीं देखा, मैंने सिर्फ एक बेटी देखी। उसका कन्यादान कर मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं।

” इस अवसर पर तेजगढ़ पूर्व सरपंच फरमान खान उर्फ गुड्डू भैया ने रामराज यादव की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा “रामराज यादव ने जो किया है, वह समाज के लिए एक मजबूत संदेश है। ऐसे लोग ही असली भारत की पहचान हैं, जहां इंसानियत सबसे ऊपर है।” वहीं दूल्हा शाहिद के मित्र शोएब पठान ने भी इस आयोजन को देखकर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा “यहां आकर देखा कि यादव जी ने अपने खर्चे से एक मुस्लिम बेटी का विवाह कराया। हमारे क्षेत्र में ऐसे लोग भी होते हैं, यह देखकर मैं स्वयं गर्व महसूस कर रहा हूं।” शादी समारोह सादगीपूर्ण और आपसी सम्मान के माहौल में संपन्न हुआ, जहां मुस्लिम धर्म की भावनाओं का पूरा ध्यान रखा गया। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने इस पहल को गंगा-जमुनी तहज़ीब की सजीव मिसाल बताया।

विदाई के वक्त भावुक हुआ पूरा परिवार जब बेटी की विदाई का समय आया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। रामराज यादव ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की आँखें नम हो गईं। जिस बेटी को वर्षों तक अपने आंचल में पाला, उसे विदा करते समय हर चेहरे पर भावनाओं का सैलाब साफ दिखाई दे रहा था। बेटी ने भी भर्राई आवाज़ में रामराज यादव की पत्नी से लिपट कर रोने लगी, मानो सगे माता पिता से विदा ले रही हो। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं और यह साबित कर दिया कि रिश्ते खून से नहीं, इंसानियत और प्रेम से बनते हैं।

निस्संदेह, रामराज यादव जैसे लोग ही हमारे भारत को खूबसूरत बनाते हैं, जो यह साबित करते हैं कि मानवता, प्रेम और जिम्मेदारी किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं होती।

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