दमोह जिले के किसानों ने इस बार गेहूं व चना की फसल पर ज्यादा जोर लगाया है और रबी सीजन के बीच पड़ाव में फसलों की स्थिति उम्मीद जगाने वाली है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खेतों में गेहूं की फसल अधिक लहलहाती नजर आ रही है। समय पर बोवनी, अनुकूल मौसम और पर्याप्त सिंचाई से फसल की वृद्धि बेहतर बताई जा रही है। अगले एक से दो पखवाड़े में बालियां निकलने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। गेहूं के बाद किसानों ने चने की फसल पर भी ध्यान दिया है।
खेतों में चना भी अच्छी स्थिति में दिखाई दे रहा है। जिससे चने की फसल का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों का कहना है कि असली तस्वीर अब आने वाले एक से डेढ़ माह में साफ होगी। इसी दौरान फसल को मौसम की मार, कीट प्रकोप और नमी संतुलन की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। किसानों के अनुसार यदि मौसम अनुकूल रहा और बारिश या तेज ठंड ने नुकसान नहीं पहुंचाया, तो इस बार उत्पादन बेहतर हो सकता है।
फिलहाल मौसम मेहरबान, फसलों को फायदा
इस बार मौसम फसलों के अनुकूल बना हुआ है। तापमान और नमी के संतुलन से गेहूं व चने की फसलों की ग्रोथ अच्छी हो रही है। अब तक कहीं से फसल खराब होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। जिससे किसान खुश है।
गेहूं का 6 लाख टन हो सकता है उत्पादन
जिले में इस बार गेहूं का उत्पादन 5 से 6 लाख टन तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही चने का उत्पादन 80 हजार टन से ज्यादा, मटर का उत्पादन 60 हजार से टन और मसूर का उत्पादन 30 हजार टन से अधिक होने की संभावना है। जिससे किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
किसानों को जनवरी-फरवरी में जरूरी सलाह…
- सिंचाई प्रबंधन: जनवरी और फरवरी में फसल को आवश्यकता अनुसार सिंचाई दें। अधिक पानी से बचें, ताकि जड़ों में सड़न न हो और पौधों का विकास संतुलित बना रहे।
- कीट व रोग निगरानी: अभी कीट और रोगों पर नियमित नजर रखें। लक्षण दिखते ही विशेषज्ञ सलाह से दवा का छिड़काव करें।
- खरपतवार नियंत्रण: खेतों में उगने वाली खरपतवार समय पर निकालें। इससे उत्पादन पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
- उर्वरक प्रबंधन: फसल की अवस्था देखकर उर्वरक का संतुलित उपयोग करें। खाद की सही मात्रा देने से दाने भराव बेहतर होगा।
फैक्ट फाइल
1.76 लाख हेक्टेयर में गेहूं
69 हजार हेक्टेयर में चना
40 हजार हेक्टेयर में मटर
34 हजार हेक्टेयर में मसूर
6 हजार हेक्टेयर में अन्य फसलें









