देवलाई प्राथमिक शाला मौत के साए मे, 54 मासूमों की जिंदगी दांव पर, छत कभी भी ढह सकती है! मिड-डे-मील में भी शर्मनाक लापरवाही — विभाग की चुप्पी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, “कौन लेगा बच्चों की जान का जिम्मा?”
दमोह/पथरिया। देवलाई गांव की शासकीय प्राथमिक शाला की जर्जर हालत अब किसी बड़े हादसे का इंतजार करती दिख रही है। स्कूल भवन की दीवारें चारों ओर से फटी हुई हैं, छत जगह-जगह झुकी हुई है और बरसात में पानी सीधे कक्षाओं में टपकता है। हालात इतने खतरनाक हैं कि 54 मासूम रोजाना मौत के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। लकड़ी और कमजोर खंभों के सहारे टिकी छत किसी भी समय गिर सकती है, पर विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठा है।
शर्मनाक तस्वीर मिड-डे-मील में भी देखने को मिली। बच्चों ने बताया कि खीर साल में सिर्फ दो दिन—15 अगस्त और 26 जनवरी को मिलती है, जबकि बाकी दिनों में दाल-चावल भी ठीक से नहीं मिलता। भोजन की गुणवत्ता वर्षों से सवालों के घेरे में है, पर कार्रवाई शून्य।
अभिभावकों ने चेताया—“हम बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, जोखिम में डालने नहीं। अगर स्कूल भवन और भोजन व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो देवलाई बड़ा आंदोलन करेगा।”

प्रधानाध्यापक पवन सिंह लोधी ने बताया कि मामले की जानकारी बीआरसी पथरिया को दे दी गई है और गौंड खनिज मद से जारी राशि से केवल स्लैब का कार्य हुआ है, बाकी मरम्मत अब तक अधर में है।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—“किसी अनहोनी की जिम्मेदारी कौन लेगा?” प्रशासन के जवाब का इंतजार अब हर बीतते दिन के साथ और खतरनाक हो रहा है।









