दमोह जिले के सिंग्रामपुर वन परिक्षेत्र में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि सुबह घर से बाहर निकलना और सड़कों पर चलना भी ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा हो गया है। बंदरों के झुंड गलियों, सड़कों और घरों की छतों पर घूमते नजर आ रहे हैं, जो राहगीरों पर झपट रहे हैं और बच्चों को निशाना बना रहे हैं।
इससे पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है।
बुधवार सुबह घर के आंगन में खेल रहे तीन वर्षीय मासूम विनायक मेहरा, पिता रोहित मेहरा, पर दो बंदरों ने अचानक हमला कर दिया।
बंदरों ने बच्चे को काट लिया, जिससे उसके दाहिने पैर में गंभीर घाव हो गए। परिजन तत्काल घायल बच्चे को जबेरा स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत सामान्य बताई।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। करीब दो माह पहले भी एक पांच वर्षीय बच्ची पर बंदर ने हमला कर दिया था।
ग्रामीण अखिल सिंघई ने बताया कि उनकी बेटी स्कूल गई थी, तभी दोपहर में सूचना मिली कि बंदर ने उस पर हमला कर दिया है। बच्ची की पीठ और कमर के पास गंभीर चोटें आई थीं।
वहीं अवधेश जैन, सिद्धार्थ जैन और आकाश राय का कहना है कि सुबह टहलने निकलने वाले लोग बंदरों के झुंड देखकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
कई बार बंदर राहगीरों पर झपट पड़ते हैं और घरों की छतों से सामान उठाकर ले जाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में बंदरों की संख्या अब पचास से अधिक हो चुकी है। स्कूल और आंगनवाड़ी परिसरों में भी डर का माहौल है। बच्चे सहमे हुए हैं और अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
ग्रामीण सत्येंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो बंदरों के हमलों से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और ग्राम पंचायत से तत्काल बंदरों को पकड़ने और राहत दिलाने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।









