लोक अदालत की पहल से टूटा संदेह, फिर जुड़े रिश्ते
साल की अंतिम लोक अदालत बनी सुलह और संवेदना की मिसाल
दमोह। जिला न्यायालय में शनिवार को आयोजित साल की अंतिम लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि संवाद, समझदारी और संवेदनशील पहल से टूटते रिश्तों को जोड़ा जा सकता है। इस लोक अदालत में जहां कुल 690 राजीनामा योग्य प्रकरण रखे गए, वहीं कुटुंब न्यायालय में सामने आए दो वैवाहिक विवादों ने सबका ध्यान आकर्षित किया, जिनमें लंबे समय से अलग रह रहे दंपति मुकदमेबाजी का अंत कर पुनः एक हो गए।
हटा ब्लॉक के ग्राम अधरौटा निवासी रेवा रायकवार और गढ़ाकोटा निवासी शंकर रायकवार के बीच बीते छह माह से चला आ रहा वैवाहिक विवाद लोक अदालत में आपसी सुलह के साथ समाप्त हो गया। शंकर और रेवा का विवाह छह वर्ष पूर्व हुआ था और उनके दो बच्चे देवेंद्र व भरत हैं। प्रारंभिक वर्षों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में संवादहीनता, मोबाइल फोन से जुड़ी शंकाओं, गलतफहमियों और दहेज प्रताड़ना के आरोपों के चलते रिश्तों में तनाव बढ़ गया। एक परिचित की भूमिका को लेकर उत्पन्न संदेह ने विवाद को और गहरा कर दिया, जिससे मामला परिवार न्यायालय तक पहुंच गया।
लोक अदालत में अधिवक्ता नरेंद्र शुक्ला, अधिवक्ता पंकज खरे सहित अन्य अधिवक्ताओं ने दोनों पक्षों से अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से चर्चा कर सुलह के प्रयास किए। इसके पश्चात परिवार न्यायालय के माननीय न्यायाधीश मुहम्मद अजहर ने बच्चों के भविष्य और परिवार की अहमियत को सामने रखते हुए दोनों को संवेदनशीलता के साथ समझाइश दी। न्यायालय की पहल का सकारात्मक असर हुआ और दोनों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का संकल्प लिया।
इसी प्रकार दूसरा मामला रूबी और अभिषेक का रहा, जहां पति-पत्नी के बीच मोबाइल फोन को लेकर उत्पन्न गलतफहमी ने विवाद का रूप ले लिया था। दोनों के दो बच्चे हैं और सितंबर 2025 में वे अलग हो गए थे। मामला कुटुंब न्यायालय में विचाराधीन था, लेकिन लोक अदालत में अधिवक्ता पंकज खरे की पहल और न्यायालय की समझाइश के बाद दोनों दंपति भी साथ रहने पर सहमत हो गए।
लोक अदालत में सुलह के बाद भावुक दृश्य देखने को मिले। रेवा और शंकर ने एक-दूसरे को माला पहनाकर दोबारा अलग न होने का संकल्प लिया, वहीं रूबी और अभिषेक ने भी साथ मिलकर नए सिरे से जीवन शुरू करने की सहमति जताई। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मुहम्मद अजहर एवं जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया ने दंपतियों को पौधे भेंट किए और शुभकामनाएं दीं कि जैसे-जैसे पौधे बढ़ें, वैसे-वैसे उनके रिश्तों में भी प्रेम, विश्वास और समझ बढ़ती रहे।
विशेष न्यायाधीश उदय मरावी ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी के निर्देशन में आयोजित इस विशेष जन लोक अदालत के लिए 21 विशेष खंडपीठों का गठन किया गया था। लोक अदालत में फैमिली कोर्ट, सिविल सहित अन्य राजीनामा योग्य मामलों का निराकरण किया गया, जिससे न्यायालयों पर लंबित प्रकरणों का बोझ कम हुआ।
चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल मनीष नगाइच ने कहा कि वर्तमान समय में दंपतियों के बीच मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, संवाद की कमी और आपसी अविश्वास दांपत्य विवाद की बड़ी वजह बन रहे हैं। समय रहते संवाद और समझदारी से ऐसे विवादों को न्यायालय तक पहुंचने से रोका जा सकता है।
इस पूरी सुलह प्रक्रिया में अधिवक्ता फिरोज खान, मदन जैन, शिवानी पाराशर, ऋचा त्रिपाठी एवं सोनू सैनी सहित अन्य अधिवक्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। साल की अंतिम लोक अदालत ने यह संदेश दिया कि लोक अदालत न केवल त्वरित न्याय का मंच है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और पारिवारिक सौहार्द को मजबूत करने का सशक्त माध्यम भी बन रही है।









