डीजल जिप्सियों का संचालन जारी, अवैध खनन और गांवों का विस्थापन भी अधूरा
दमोह।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में उत्तराखंड के जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रकरण में जारी किए गए अहम निर्देश देशभर के सभी टाइगर रिजर्व पर लागू हैं, लेकिन वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) में इनका अब तक प्रभावी अमल शुरू नहीं हो पाया है। जमीनी हालात यह हैं कि रिजर्व के कोर एरिया में पहले की तरह जंगल सफारी कराई जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कोर या क्रिटिकल टाइगर हैबिटैट में सभी प्रकार की गतिविधियों पर स्पष्ट रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
पर्यावरण के लिए नुकसानदेह डीजल वाहन बदस्तूर चल रहे
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिजर्व और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केवल इलेक्ट्रिक या पर्यावरण अनुकूल वाहनों के उपयोग का निर्देश दिया था। इसके बावजूद वीडीटीआर में अब भी आधा दर्जन से अधिक डीजल जिप्सियां संचालित हो रही हैं। इनमें से कुछ वाहन दशकों पुराने बताए जा रहे हैं, जो ध्वनि और वायु प्रदूषण के जरिए जंगल के प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।
सफारी के नाम पर नियमों की अनदेखी
पर्यटक सफारी के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कोर एरिया जैसे संवेदनशील हिस्सों में लगातार मानवीय दखल बना हुआ है। वहीं टाइगर रिजर्व का अमला कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक बना हुआ नजर आ रहा है।
अवैध खनन और अधूरा विस्थापन भी बड़ी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध खनन, कब्जों और निर्माण को हटाने के भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि जंगल की मिट्टी, जल स्रोत और जैव विविधता सुरक्षित रह सके। इसके बावजूद वीडीटीआर क्षेत्र में कई स्थानों पर अवैध खनन की गतिविधियां जारी हैं। इतना ही नहीं, विस्थापन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण आज भी तीन दर्जन से अधिक गांव टाइगर रिजर्व के भीतर बसे हुए हैं।
वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ़ी
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो इसका सीधा असर बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर पड़ेगा। कोर एरिया में लगातार बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप बाघों के प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन पर भी असर डाल सकता है।
प्रशासन का दावा, लेकिन कार्रवाई नदारद
इस संबंध में वीडीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए.ए. अंसारी का कहना है—
“सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देश बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके पालन को सुनिश्चित कराने के लिए तैयारी की जा रही है। जल्द ही टाइगर रिजर्व में इसका असर दिखाई देगा।”
हालांकि, फिलहाल जमीनी स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।









