दमोह। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में जंगल सफारी के लिए अब ई-वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य होने जा रहा है। प्रबंधन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्तमान में रिजर्व क्षेत्र में डीजल जिप्सियों से सफारी कराई जाती है, लेकिन इनके धुएं और शोर से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। इसी कारण चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों को लागू करने का निर्णय लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार अगले छह माह के भीतर पूरी व्यवस्था को ई-वाहन आधारित बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत ई-वाहन खरीद, किराये की व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था और रूट निर्धारण जैसे कार्य तेजी से शुरू होंगे। साथ ही ड्राइवरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है।
निजी वाहन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित
नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम लोगों के निजी वाहनों का जंगल में प्रवेश पूरी तरह बंद हो जाएगा। अभी कई लोग ट्रैकिंग, पिकनिक या अन्य बहानों से वाहन अंदर ले जाते थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सिर्फ अधिकृत ई-वाहन और विभागीय उपयोग के वाहन ही अंदर जा सकेंगे। नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई भी होगी।

अभी चल रही जिप्सियों की जगह आएंगे ई-वाहन
वर्तमान में टाइगर रिजर्व में आठ डीजल जिप्सियां सफारी के लिए चलती हैं। इनमें से कई वाहन पुराने हैं और अधिक प्रदूषण फैलाती हैं। जानकारी के अनुसार शुरुआत में चार से पांच ई-वाहन लगाए जाएंगे, और आवश्यकता अनुसार संख्या बढ़ाई जाएगी।
ई-वाहन के फायदे
ई-वाहन पूरी तरह पर्यावरण हितैषी, धुआं नहीं छोड़ते और प्रदूषण कम करते हैं।
बिना आवाज चलेेेेने के कारण वन्यजीवों में तनाव नहीं होगा।
डीजल वाहनों की तुलना में रखरखाव कम और संचालन सस्ता पड़ेगा।

पर्यटकों को शांत, स्वच्छ और बेहतर सफारी अनुभव मिलेगा।
इधर, प्रबंधन के ए.ए. अंसारी, डिप्टी डायरेक्टर ने बताया
“सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनमें टाइगर रिजर्वों में डीजल वाहनों के स्थान पर ई-वाहन लागू करना शामिल है। इसी के तहत वी.डी.टी.आर में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।”
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सफारी न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी।








