दमोह फाल्गुन पूर्णिमा पर इस वर्ष होली का पर्व चंद्र ग्रहण की छाया के बीच मनाया गया। ग्रहण के समय और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए शहर में होलिका दहन निर्धारित मुहूर्त के अनुसार कराया गया। देर रात 2 बजे तक शहर के विभिन्न वार्डों में होलिकाएं जलती रहीं और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया।
शहर के पुराना थाना, घंटाघर, पुलिस लाइन, सिविल वार्ड, बढ़पुरा, धरमपुरा, चैनपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। चौक-चौराहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी के निर्देशन में पूरे शहर में पुलिस बल तैनात रहा। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी। अधिकारियों की निगरानी में निर्धारित समयानुसार होलिका दहन संपन्न कराया गया। पुलिस प्रशासन द्वारा नागरिकों से शांतिपूर्ण ढंग से पर्व मनाने की अपील भी की गई।
चंद्र ग्रहण का दिखा असर
इस बार फाल्गुन पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण का संयोग होने से लोगों में विशेष उत्सुकता रही। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण काल में पूजन-पाठ से परहेज रखा गया, इसलिए कई स्थानों पर ग्रहण समाप्ति के बाद ही होलिका दहन किया गया। कई परिवारों ने घरों में पहले ही पकवान बनाकर रख लिए थे और ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट भी परंपरा अनुसार बंद रहे।
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है, इसलिए लोगों ने स्नान, दान और मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर होलिका दहन स्थल पर पहुंचकर पूजन किया गया।
तैयारियों को लेकर विशेष इंतजाम
नगरपालिका द्वारा पूर्व से ही प्रमुख चौराहों की सफाई कराई गई थी। होलिका स्थलों पर लकड़ी और उपले एकत्र किए गए थे। अग्निशमन वाहन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया। विद्युत विभाग ने ढीले तारों और ट्रांसफॉर्मरों की जांच कर ली थी, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की खरीदारी दिनभर चलती रही। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। हालांकि प्रशासन की सख्ती के चलते डीजे और तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण रखा गया।
शांति और सौहार्द का संदेश
होलिका दहन के अवसर पर सामाजिक संगठनों ने आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। कई स्थानों पर प्रसाद वितरण भी किया गया। प्रशासन की सतर्कता और नागरिकों के सहयोग से शहर में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
आज धुरेड़ी पर सुबह से ही रंगोत्सव की शुरुआत होगी। शहर में पारंपरिक ढंग से एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व मनाया जाएगा इस बार ग्रहण के चलते 3 और 4 मार्च को होली का योग माना जा रहा है। और लोगो द्वारा दोनों दिन होली का पर्व मनाया जाएगा।








