दमोह शहर स्थित मां बड़ी देवी मंदिर परिसर में रविवार को अहिरवार सूर्यवंशी, जाटव समाज समिति के बैनर तले जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गौतम बुद्ध, सतगुरु संत रविदास जी महाराज एवं संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर जी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया गया। इस दौरान उपस्थित अतिथियों ने सामाजिक एकता और जागरूकता का संदेश दिया।
समाज सुधार पर हुई व्यापक चर्चा
आयोजन समिति के अध्यक्ष भगवानदास चौधरी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए समाज सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज कुरीतियों से मुक्त नहीं होगा, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है।
विभिन्न वक्ताओं ने दहेज प्रथा, शराबखोरी, मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त करने पर जोर दिया। समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से इन कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि इन प्रथाओं के कारण समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर होता है, इसलिए जागरूकता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
शिक्षा और अधिकारों के लिए एकजुट रहने की अपील
सम्मेलन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित रहने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने युवाओं और बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने, चिकित्सा, प्रशासन और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी समस्या को संविधान के दायरे में रहकर शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
5 हजार से अधिक लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में दमोह सहित हटा, पटेरा, बटियागढ़, पथरिया, तेंदूखेड़ा, जबेरा, नोहटा और तेजगढ़ ब्लॉक सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 5 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई। सम्मेलन के अंत में सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर भोजन किया।
आयोजन के समापन पर जिला अध्यक्ष भगवानदास चौधरी ने सभी अतिथियों और समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।








