
दमोह शहर के धरमपुरा मुक्तिधाम के पास मंगलवार सुबह एक अज्ञात शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। बाद में मृतक की पहचान तेजगढ़ थाना अंतर्गत कांकर निवासी लखन पिता पुरुषोत्तम आदिवासी (उम्र 50 वर्ष) के रूप में हुई। परिजनों को सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह था कि शव करीब चार से पांच घंटे तक मुक्तिधाम के पास ही पड़ा रहा।
परिजनों ने बताया कि उन्होंने शव वाहन के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की। उल्टा अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया और शव वाहन भेजने से मना कर दिया। आखिरकार परिजनों को मजबूरन ऑटो रिक्शा से ही शव को जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

अस्पताल पहुंचने पर हालात और भी शर्मनाक निकले। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न तो कोई अटेंडर मौजूद था और न ही शव रखने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध था। मजबूरी में मृतक लखन का शव मर्चुरी के बाहर सड़क पर ही रखा रहा।

परिजनों ने बताया कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधक सुरेंद्र सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। परिजनों ने आरोप लगाया कि “जिला अस्पताल में यह हालात कोई नए नहीं हैं। आए दिन मरीजों और मृतकों के परिजनों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अधिकारी केवल अपनी झूठी वाहवाही लूटने में लगे रहते हैं।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पूर्व ही स्वयं को जिला अस्पताल का प्रबंधक बताने वाले सुरेन्द्र सिंह ने बयान जारी कर शव वाहन के लिए सूचना देने की अपील की थी और शव वाहन चालकों के फोन नंबर जारी किए थे। लेकिन तमाम वादे धरातल खोखले साबित होते दिखाई दिए और मजबूरन परिजनों को शव को ऑटो रिक्शा से ले जाना पड़ा।

वहीं पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों के द्वारा हत्या की आशंका जताई जा रही है। अब यह हत्या है या आत्महत्या यह पुलिस जांच का विषय है। जहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के मुख्य कारणों का खुलासा किया जा सकेगा।








